जंडियाला गुरु का सरकारी सीनियर सैकंडरी स्कूल (लड़के )के 25 कमरों में से  17 कमरे अनसेफ, कभी भी हो कोई हादसा…..

जंडियाला गुरु (प्रदीप जैन;गुलशन विनायक) : जंडियाला गुरु का एकमात्र सरकारी सीनियर सैकंडरी स्कूल जो सरकारों की अनदेखी कारण कभी भी खत्म हो सकता है।सबसे पहले बात करें स्कूल की बिल्डिंग की जो कई वर्षों से अनसेफ घोषित की हुई है ।जिनमे कुल 25 कमरों में से 17 कमरे अनसेफ है।इस समय स्कूल में कुल 660 छात्र है जो स्कूल  से शिक्षा ग्रहण कर रहें हैं।इनमे से सभी अनसेफ कमरे स्कूली प्रशासन ने बंद किये हुए है ।कई कमरों की इतनी दयनीय हालत हो चुकी है कि उनकी छत्त भी बीच मे से टूट गई है ।इन अनसेफ कमरों के चलते कभी भी कोई स्कूल में घटना घट  सकती है लेकिन शिक्षा विभाग कुम्भकर्णी नींद सोया हुआ है । बारिश के दिनों में यहां तीन से चार फुट तक पानी भर जाता है चाहे बच्चे हो चाहे अध्यापक  वह पानी में  गुर्जर के ही स्कूल में पहुंचते हैं  ।कई बार  स्कूल में  छुट्टी करनी पड़ती है  बच्चे नहींआते मगर स्कूल के अध्यापकों को अपने टाइम पर ही छुट्टी मिलती है ।यह है कि यहाँ पर कई विषयों के अध्यापकों की भी कमी है जिसके चलते विषयों के अध्यापक न होने के कारण छात्रों का भविष्य भी धुंधला नज़र आ रहा है ।जैसे अब परीक्षा के दिन है लेकिन अधयापक न होने की वजह से उनका सिलेबस तो पूरा होना दूर की बात उनके लिए एक चैप्टर भी बिना अधयापक के पढ़ पाना मुश्किल है ।एक तरफ जहाँ शिक्षा विभाग  परीक्षाओं के दिन नकल रोकने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाता है ।लेकिन जिन छात्रों ने अधयापक न होने की वजह से कभी एक पन्ना भी किताब न पड़ा हो वो कैसे  परीक्षा दे पाएंगे ।कुछ अभिभावकों ने पत्रकार से बातचीत करते हुए कहा कि जहाँ सरकार द्वारा नकल के खिलाफ मुहिम चलाई जाती है वहीं पहले इन स्कूलों में अधयापकों की कमी पूरी की जाए ।इसलिए कि नकल मारने की जरूरत न पड़े ।स्कूल के प्रिंसिपल कमलजीत सिंह ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि इस समय मुख्य तौर पर एग्रीकल्चर 1 ,इलेक्ट्रिकल 2 ,अगरोनॉमिस्ट ,पंजाबी 1 ,कामर्स 2,डी पी 1 ,मैथ 2 ,एस एस 1 समेत काफी विषयो के अध्यायपक के पद रिक्त पड़े हुए हैं लेकिन शिक्षा विभाग ने इन पदों को भरने की प्रकिरिया नही शुरू की है ।जिसके चलते इसका बुरा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है ।स्थानीय निवासियों ने सरकार से मांग की कि इस स्कूल की खस्ता हालत बिल्डिंग  की मुरमत के लिए  ग्रांट जारी की जाए और खाली पड़े अधयापकों के पदों को तुरंत भरा जाए।

 

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