दिल्ली में दुकानबंदी का दंगल

दिल्ली में दुकानबंदी (सीलिंग) को लेकर बड़ा मजेदार दंगल चल रहा है। दिल्ली में तीन प्रमुख राजनीतिक दल हैं। एक आम आदमी पार्टी, दूसरी भाजपा और तीसरी कांग्रेस! ये तीनों दल अपने मतदाताओं को पटाने में लगे हुए हैं। कोई दल यह नहीं चाहता कि दिल्ली की उन दुकानों पर ताला लग जाए, जो लोगों के घरों से चल रही हैं या घरों के तलघरों से चल रही हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने एक कमेटी बिठा कर उन सब दुकानों को बंद करने का आदेश दिया है, जो घरों से चल रही हैं। उस कमेटी का कहना है कि घरों से दुकान चलाना बिल्कुल नियम-विरुद्ध है, क्योंकि उसके कारण लोग अनधिकृत निर्माण कार्य कर लेते हैं, जो अड़ौसी-पड़ौसियों के लिए तो तकलीफदेह होता ही है, मोहल्लों के रास्ते भी संकरे होते जाते हैं। दुकानों पर होने वाली चहल-पहल से आवासी बस्तियों की शांति भी भंग होती है। प्रदूषण भी बढ़ता है।

सर्वोच्च न्यायालय के तर्क ठीक हैं लेकिन बरसों से चल रही ये दुकानें उन बस्ती वालों के लिए बहुत सुविधाजनक बन गई हैं। दुकानदारों और खरीदारों दोनों को इसकी आदत पड़ गई है। इसके अलावा उन दुकानों को बंद कर देने से दिल्ली के लाखों लोगों का रोजगार खत्म हो सकता है। इसीलिए सभी दल इस दुकानबंदी (सीलिंग) के विरुद्ध हैं लेकिन मजा देखिए कि केजरीवाल सरकार आरोप लगा रही है कि यह काम उप-राज्यपाल केंद्र सरकार के इशारे पर कर रहे हैं और भाजपा आरोप लगा रही है कि यह नौबत दिल्ली सरकार की लापरवाही के कारण आई है। दोनों पार्टियों के नेताओं और कार्यकर्ताओं में कल धक्का-मुक्का भी हो गई। होना तो यह चाहिए था कि आप, भाजपा और कांग्रेस मिलकर दिल्ली के दुकानदारों और उपभोक्ताओं की मदद करतीं और कोई ऐसा रास्ता निकालतीं, जो कि सर्वोच्च न्यायालय की मन्शा का सम्मान करते हुए मतदाताओं की हितों की रक्षा भी करता।

Leave a Reply

Your email address will not be published.